life of Men
Ek Eshi Story Jis ke barre me ajj tak kisi ne nahi likha hoga admi, Ladka Ya Men khus bhi kah sakte ho अब कुश्र भी कह सक्ते हो आदमी वो खिलोन है जो अप्ने दुख किसी को बता नही सकता ओर चुपा सकता है बस चुप चाप जिह्गी बिता रह्ता है दुस्स्रो के बिता देता है
आओ एक कहानी सुनता हु एक लड्के जिस्स्का नाम सेम है जो भारत्त के एक उत्त्त्र्र प्रदॆश के सहरनपुर एक छोथे से चिचोरि का रह्नेने वाला है जिस्के पिता एक पर्चुन के दुकन चलते थे ओर मा एक लोगो के कप्द्दे सिल्ते थी ओर सेम जो अभी एक collage से पास हो के घर पे खली बैठा है जिसने MCA कि पढ़ाई पूरी की है सैम पढ़ने में अच्छा था लकिन फिर भी वो घर में बेठा है बिना जॉब के उसे घर में बैठे हुई ६ महीने बीत जाहते है उसे कोई नौकरी नहीं मिलती! अब तो उस के घर वाले भी उसे तने मरने लगते है की तू किसी काम का नहीं है जब देखो में घर में ही पड़ा रहता है मुफ्त की रोटी तोड़ता है है खुश काम क्यों नहीं करता, कही जा के मर क्यों नहीं जाता है कब तक हमारी छाती पे मुंग डालेगा ऐसे तने मिलते रहते थे!
उसे के पिता उसे बोलते अगर तुझे कही जा के काम नहीं करना तो दुकान पे बेथ के दुकान संभल ले, लकिन सेम का दुकान पे मन नहीं लगता था इसलिए उसे मन कर दिया!
ऐसे ही दो महीने और बीत गए रोज के तने सुंनते वो परेशान हो गया था, लकिन आज भी वही चल रहा था , फिर एक दिन उसका एक दोस्त जिसका का नाम सुरेश था, और उसने भी इश्के साथ ही MCA की पढ़ाई पूरी की थी लकिन उसे collage की placement से नौकरी मिल गयी थी जो कंपनी दिल्ली में थी और वो पढ़ाई पूरी करने के बाद ही दिल्ली चला गया था,
वो दिल्ली के इनसेट नाम की कंपनी के सीनियर पोस्ट पे था,
वो गांव में बहुत दिनों बाद आया, वो अपने दोस्त सेम से मिलने पौचा उसे देख के सेम की मम्मी बहुत खुस हुई और सेम भी बहुत खुस हुआ, सेम और सुरेश दोनों मिलके बात करने लगे सेम उसे अपने परेशानी के बारे में बाटने लगा सुरेश उसे भी अपनी कंपनी के बार्रे में बताने लगा की कंपनी बहुत बढ़िया है उसे वह काम करके मज़्ज़ा यह रहा है
सेम ये सुन ख़ुश हो गया, और भी ये सोचने लगा की अगर उसकी भी अगर उसकी भी अगर नौरकरी इस कंपनी मे लग जाये तो वो भी लाइफ कुस कर सके, वो सोच ही रहा थी की इतने सुरेश बोला अगर तो है बोले तो तुझे भी अपनी कंपनी में जॉब लगवा दू
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